यह खबर हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में फर्जी बीपीएल कार्डधारकों के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों की जानकारी देती है. मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
शिकंजा कसा: हरियाणा सरकार ने फर्जी तरीके से बीपीएल सूची में शामिल लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी है.
विशेष अभियान: 1 मार्च से 1 अप्रैल 2025 तक चले अभियान में 1609 परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर किया गया.
फर्जीवाड़ा का कारण: इन परिवारों ने कम आय दिखाकर या अन्य गलत तरीके अपनाकर बीपीएल कार्ड बनवाए थे, जबकि उनकी वास्तविक आय अधिक थी.
अंतिम चेतावनी: सरकार ने ऐसे सभी फर्जी कार्डधारकों को 20 अप्रैल 2025 तक खुद नाम हटवाने की चेतावनी दी है.
कानूनी कार्रवाई: निर्धारित समय तक नाम न हटाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी.
मुख्यमंत्री का आदेश: मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बजट सत्र में इस पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए थे.
बड़ी संख्या में बीपीएल परिवार: हरियाणा में 51 लाख से ज्यादा परिवार बीपीएल सूची में हैं.
पात्रता: बीपीएल का लाभ केवल उन परिवारों को मिलना चाहिए जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम हो.
फर्जीवाड़े का तरीका: लोगों ने फैमिली आईडी में गलत जानकारी दी, जैसे खुद को अकेला दिखाना, परिवार का विभाजन दिखाना या नकली आय प्रमाण पत्र देना.
नुकसान: फर्जीवाड़े से सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाया जा रहा है, जिससे असली जरूरतमंद वंचित हो रहे हैं और सरकारी संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है.
एफआईआर की चेतावनी: सरकार ने 20 अप्रैल के बाद नाम न हटवाने वालों के खिलाफ एफआईआर और लाभों की वसूली की बात कही है.
गलती से शामिल होने पर क्या करें: यदि कोई गलती से बीपीएल सूची में शामिल हो गया है, तो उन्हें फैमिली आईडी पोर्टल या सीएससी सेंटर पर जाकर जानकारी अपडेट करने की सलाह दी गई है.
बीपीएल में बने रहने के लिए जरूरी बातें: सही जानकारी देना, आय प्रमाण पत्र सही देना और फैमिली आईडी में झूठी जानकारी से बचने की सलाह दी गई है.
संक्षेप में, हरियाणा सरकार फर्जी बीपीएल कार्डधारकों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है और उन्हें स्वेच्छा से नाम हटाने का अंतिम मौका दे रही है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह कदम सही लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
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