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सरकारी योजना

स्कूल छोड़ चुके बच्चों के हाथों में फिर से होंगी किताबें, घर-घर जाकर ‘ड्रॉपआउट’ विद्यार्थी को ढूंढने में लगे गुरुजी

Raman Deep Kharyana :-

school dropouts again have books in their hands teachers go door to door to find dropout students


हरियाणा शिक्षा विभाग ने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस लाने का अभियान शुरू किया है। 2026-27 तक सभी 6-14 आयु वर्ग के बच्चों को स्कूलों में लाने का लक्ष्य है। शिक्षक शीतकालीन अवकाश में घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत कमजोर वर्ग के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस लाने का अभियान


शिक्षक शीतकालीन अवकाश में घर-घर सर्वे कर रहे हैं


कमजोर वर्ग के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा


हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़ चुके (ड्रापआउट) बच्चों को दोबारा स्कूलों तक लाने की मुहिम चालू की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऐसे सभी बच्चों को वापस स्कूलों में लाने के लिए शिक्षकों ने घर-घर दस्तक देनी चालू कर दी


शिक्षा विभाग का प्रयास है कि छह से 14 साल तक की आयु के उन सभी बच्चों को वापस स्कूलों में लाया जाए, जो स्कूलों से जी चुरा चुके हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्कूल शिक्षा विभाग को ऐसे सभी बच्चों को वापस स्कूलों तक लाने के निर्देश दिए हैं।


हरियाणा में 15 जनवरी तक स्कूलों के शीतकालीन अवकाश चल रहे हैं। इन अवकाश के दौरान गुरुजी सैर-सपाटा नहीं करेंगे, बल्कि ड्रापआउट बच्चों को ढूंढ रहे हैं। स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पंजीकरण करने के लिए शिक्षक घर-घर जा रहे हैं।


शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल जाने वाले और ड्रापआउट बच्चों की पहचान के लिए सर्वे की योजना तैयार की गई है। इसके तहत छह वर्ष से 14 वर्ष और 16 से 19 साल की आयु वर्ग के उन सभी विद्यार्थियों का पंजीकरण किया जाएगा, जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं


स्कूल स्तर पर पहली जनवरी से नौ जनवरी तक सर्वे किया जाएगा, जिसमें प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक तथा एजुकेशन वालंटियर को सर्वे के लिए स्कूल मुखिया द्वारा आउट आफ स्कूल बच्चों की लिस्ट मुहैया करवाई जाएगी, जिसके आधार पर सर्वे हो रहा है।


शिक्षा विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 के तहत उन सभी बच्चों का पंजीकरण किया जाएगा जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं, हालांकि आरटीई एक्ट-2009 के तहत 100 प्रतिशत पंजीकरण का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है।


नई शिक्षा नीति के तहत उन श्रेणियों तक शिक्षक पहुंच बनाएंगे, जो सबसे कमजोर श्रेणी में आते हैं। इनमें अनुसूचित जाति, सड़क पर रहने वाले बच्चे, भिखारी, अनाथ, बेघर बच्चे, माइग्रेंट और डी-नोटिफाइड आदिवासी बच्चे शामिल हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ड्राप आउट बच्चों के पंजीकरण का सर्वे चार स्तरों पर होगा।


पहला स्कूल स्तर पर पहली जनवरी से नौ जनवरी तक चलेगा। इसके बाद कलस्टर स्तर पर 12 जनवरी से 13 जनवरी तक चलेगा, जहां पर कलस्टर हेड अपने कलस्टर स्कूलों की लिस्ट तैयार करेंगे। बीआरसीएस तथा बीइओएज को रिकार्ड मुहैया करवाया जाएगा।


ब्लॉक स्तर पर 14 और 15 जनवरी तक ब्लाक हेड अपने ब्लाक के तहत कलस्टर स्कूलों की लिस्ट तैयार करेंगे और रिकार्ड डीपीसी को देंगे। इसके बाद जिला स्तर पर 16 से 19 जनवरी तक डीपीसी सभी ब्लाक की लिस्ट बनाएगी और उसे मुख्यालय में जमा कराया जाएगा।


शिक्षा विभाग की ओर से सर्वे के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की गई है, जिसके चेयरमैन एडीसी होंगे। स्कूल द्वारा सरपंच, एमसी और एसएमसी का सहयोग लिया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों की आंगनबाड़ी व आशा वर्कर और पंचायत सदस्य की भी मदद ली जाएगी।


स्कूल मुखिया सर्वे करने वाले सभी शिक्षकों से सर्टिफिकेट लेंगे कि उनके दिए गए एरिया में कोई भी आउट आफ स्कूल बच्चा नहीं बचा है और अगर सर्वे ठीक से नहीं किया गया और बाद में वहां आउट आफ स्कूल बच्चे पाए गए तो वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे।


स्कूल हेड पहचाने गए बच्चों की लिस्ट को सर्टिफ़ाई करेंगे और 6-7 साल के सभी बच्चों को स्पेशल हेड के तहत सीधे स्कूलों में एडमिशन दिया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल मुखिया, उस स्कूल को दिए गए एरिया के 100 प्रतिशत कवरेज के बारे में क्लस्टर हेड को सर्टिफिकेट जमा कराएंगे।


स्कूल छोड़ चुके बच्चों के हाथों में फिर से होंगी किताबें, घर-घर जाकर ‘ड्रॉपआउट’ विद्यार्थी को ढूंढने में लगे गुरुजी

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