डीघल में हुई महापंचायत में फैसला, अहलावत-27 के अलावा दहिया, कादियान, मलिक सहित दस खापों ने दिया समर्थन।
झज्जर में हुए पुलिस एनकाउंटर में घायल डीघल के युवक पंकज अहलावत के समर्थन में खापों की पंचायत आज को डीघल की पुरानी गोशाला के सामने हुई। जिसमें फैसला लिया गया कि अगर एक सप्ताह में न्याय नहीं हुआ तो फिर आंदोलन की कमान दहिया खाप संभालेंगी। वहीं अगर एक सप्ताह में न्याय मिला तो सभी खापें मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी इसी चबूतरे से करेंगी। पंचायत में कहा गया कि खापों के निर्णय में बैक गियर नहीं है।
एनकाउंटर में घायल हुए पंकज के पिता आनंद अहलावत ने बताया कि पंकज अपने दोस्त संदीप वकील के साथ होटल में खाना खाने गया था। लेकिन वहां बिरधाना के 5- 6 लोग थे, जिनके साथ उनका झगड़ा हुआ था। जैसे ही पंकज वहां से जाने लगा तो इसके बाद से ही एक गाड़ी पंकज के पीछे लग गई। उसे नहीं पता था कि वो पुलिस वाले हैं। 302 के आरोपित बदमाशों के साथ झगड़ा हुआ तो एसटीएफ उनकी सूचना पर तुरंत एक्टिव हो गई। जिसके खिलाफ कोई बदमाशी का कोई मामला नहीं, उसे पुलिस बदमाश बना रहा है। पंचायत में कहा गया कि शक है कि एसटीएफ वाले उन बदमाशों के साथ वहां शराब पी रहे थे।
पुलिस ने पहाड़ीपुर गांव के रोहित और एक युवक को भी हिरासत में लिया है। दोनों उस समय अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे। उन दोनों लड़कों को छोड़ा जाए, पंकज को भी पंचायत के हवाले किया जाए। अगर बाद में जरूरत हुई तो खाप अपने हिसाब से बाद में पंकज को पेश कर देगी। पंचायत में अच्छेज-पहाड़ीपुर गांव के सरपंच व पंचगामा के लोग भी पहुंचे, जिन्होंने पूरी कहानी पंचायत को बताई।
पंचायत के प्रधान जयसिंह अहलावत ने कहा कि एक हफ्ते बाद पंचायत दोबारा निर्णय लेगी, अगर तब तक पुलिस ने लड़कों को नहीं छोड़ा तो पंचायत बैक गियर नहीं लेगी। पंकज के पिता आनंद सिंह ने कहा कि हम इतना नहीं झुकेंगे कि हमारा सम्मान चला जाए।
आनंद सिंह ने बताया कि 15 जनवरी की रात पंकज दो-तीन लोगों के साथ झज्जर शहर के सांपला रोड पर स्थित गैलेक्सी होटल में गया था। वहां पर पंकज करीब 15 मिनट ही रुका। उन्होंने खाने का ऑर्डर दिया। यहां उनकी किसी से कहासुनी हो गई। इस कारण पंकज यहां से निकल गए। रात को पंकज के वहां से आने के बाद उसकी गाड़ी के पीछे किसी की गाड़ी लगी। आनंद सिंह ने आरोप लगाया कि न तो वह पुलिस की गाड़ी थी और न ही उसमें कोई व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था। उन्होंने पंकज की गाड़ी का पीछा करते हुए 3 बार रोका। उसी दौरान पंकज ने डर की वजह से उन पर अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली चला दी। उसे नहीं पता था कि सामने वाला पुलिस वाला है या कोई बदमाश। पिता ने आगे बताया कि गोली चलाने के बाद पंकज गाड़ी लेकर वहां से भाग गया। आगे जाकर उसकी गाड़ी में पंचर हो गया। उसने अपने साथी को फोन कर दूसरी गाड़ी मंगवाई। इसके बाद फिर गाड़ी पंकज का पीछा करने लगी। इसके बाद उसने गांव अच्छेज की तरफ गाड़ी भगा ली। गांव के पास पंकज ने देखा कि उसके पीछे पुलिस की गाड़ी है तो वह रुक गया।
आनंद सिंह ने आरोप लगाया कि पंकज गाड़ी से उतर गया। पंकज के साथ पुलिसवालों ने कुछ देर बात भी की और पूछा कि तुमने गोली चलाई है? इस पर उसने जवाब दिया कि कोई मेरी गाड़ी का पीछा कर रहा था, तभी डर से उसने लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली चलाई। पुलिस ने उसकी रिवॉल्वर ले ली। पुलिस ने बताया कि गोली से एक पुलिस कर्मचारी घायल हो गया है। आप साथ चलकर अपना बयान दर्ज कराओ।
पंकज के पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस पंकज को अपनी गाड़ी में ले गई। वे उसे खेतों में ले गए, जहां दो-तीन पुलिस कर्मचारियों ने पंकज को नीचे गिरा लिया और उसके ऊपर बैठकर उसके पैर में गोली मार दी। पंकज को गोली मारने के बाद उन्होंने अपनी गाड़ी को पंकज की गाड़ी से टकराया और फिर पंकज की ही रिवॉल्वर से दो फायर किए।
झज्जर एनकाउंटर मामले में हुई पंचायत, एक सप्ताह में न्याय नहीं हुआ तो दहिया खाप करेगी नेतृत्व
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