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सरकारी योजना

Transfers : हरियाणा में वेरिफिकेशन के चक्कर में अटकी ट्रांसफर पॉलिसी

Raman Deep Kharyana :-

CM के विभागों में ही सबसे ज्यादा पेंडेंसी, रिमाइंडर भेजने के बाद भी अफसर नहीं सुन रहे


हरियाणा में मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर विभाग गंभीर नहीं दिख रहे हैं। यही वजह है कि कई विभागों का सर्विस वेरिफिकेशन का डाटा अपडेट नहीं हुआ है। इसका खुलासा विभागों के स्टेल लेवल के नोडल अधिकारी (OTP) की रिपोर्ट में हुआ है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन विभागों में सबसे अधिक मुख्यमंत्री नायब सैनी के विभाग हैं।


इसके अलावा ऊर्जा मंत्री अनिल विज के विभाग भी शामिल हैं। हालांकि विभागों की ओर से जिला और स्टेट लेवल पर लगातार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। लेकिन अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे। अभी इन विभागों के कर्मचारियों की सर्विस वेरिफिकेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है।


दरअसल, सरकार की ओर से सभी विभागों में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी 2025 लागू कर दी गई है। इस पॉलिसी के तहत सभी विभागों में एक ही दिन 5 फरवरी को ट्रांसफर होने हैं। सरकार की ओर से एक साल बाद ट्रांसफर ड्राइव शुरू की गई है।


मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी-2025 फरवरी महीने में लागू हुई थी। इस पॉलिसी के तहत, 28 फरवरी 2025 तक सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया का पालन किया जाना था। हालांकि अभी तक ये शुरू नहीं हो पाई है।


`यहां पढ़िए किस विभाग में कितनी पेंडेंसी`


`CM के डिपार्टमेंट में 652 पेंडेंसी`


डाटा अपडेट करने में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत अनिल विज, कृष्ण लाल पंवार जैसे कई मंत्रियों के विभाग शामिल हैं। सीएम सैनी के एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट में अलग-अलग छह पदों के लिए 652 कर्मचारियों का डाटा वेरिफाई नहीं हो पाया है।


`अनिल विज के डिपार्टमेंट में 326 पेंडेंसी`


अनिल विज के लेबर डिपार्टमेंट में अलग-अलग पांच पोस्टों के 326 कर्मचारियों का डाटा अपडेट नहीं हुआ है। ऊर्जा विभाग में 36 कर्मचारियों का सर्विस वेरिफिकेशन नहीं किया गया है।


`मंत्री पंवार और गौतम के महकमों में भी पेंडेंसी`


खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के विभाग में 88 कर्मचारियों की पेंडेंसी दिखा रहा है। राज्य मंत्री गौरव गौतम के युवा मामलों में भी काफी पेंडेंसी है। इनके विभागों में 82 कर्मचारियों का वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है। वहीं लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट में 403 कर्मचारियों का वेरिफिकेशन पेंडिंग है।


`पॉलिसी में कंस्ट्रक्शन वर्क से जुड़े ऑफिसर्स को झटका`


ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के तहत कंस्ट्रक्शन यानी निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को झटका लगा है।

निर्माण कार्य से जुड़े अफसरों का सबसे कम 3 साल अधिकतम समय रखा है। इनमें SE, XEN, SDE व JE एक जगह 3 वर्ष से ज्यादा समय नहीं रहेंगे। अकाउंटेंट भी 3 साल से अधिक एक जगह नहीं रहेगा।

सुपरिटेंडेंट फील्ड, अकाउंट्स क्लर्क, असिस्टेंट क्लर्क, ड्राइवर, स्टेनो टाइपिस्ट, सोशल एजुकेशन एंड पंचायत ऑफिसर, पटवारी, असिस्टेंट हेड ऑफिस, क्लर्क हेड ऑफिस, डिप्टी 5 सुपरिटेंडेंट-फिल्ड, ड्राफ्ट्समैन, हेड ड्राफ्ट्समैन व सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर (फिल्ड) अधिकतम 5 साल एक जगह रहे सकेंगे। सबसे अधिक 7 साल का समय ग्राम सचिव को मिला है।


`एक साथ होंगे ट्रांसफर`


मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लगभग सभी विभागों में लागू हो गई है। श्रम विभाग, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट समेत सभी विभागों ने शेड्यूल भी जारी कर दिया है। सभी विभागों में कर्मचारी वेरिफिकेशन में पेंडेंसी दिख रही है। ऐसे में सभी विभागों में कर्मचारियों की ट्रांसफर फरवरी में होने के आसार लग रहे हैं। हालांकि किसी विशेष परिस्थिति में ट्रांसफर प्रशासनिक सचिव की सिफारिश पर सीएम के अनुमोदन पर ही होगी।


`अभी CM के हाथ में ट्रांसफर पावर, मंत्री खाली हाथ`


हरियाणा में सरकारी विभागों में कुल 2,73,301 कर्मचारी कार्यरत हैं। मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने के बाद इन सभी कर्मचारियों को राहत मिलेगी। इससे कर्मचारियों को घर या घर से नजदीक जिलों में काम करने का मौका मिल सकेगा। पारदर्शिता बढ़ेगी। कर्मचारियों को अपने ट्रांसफर के लिए मंत्रियों, सीनियर अधिकारियों के यहां सिफारिश के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।


हालांकि अभी ट्रांसफर मुख्यमंत्री स्तर पर ही हो रहे हैं। सीएमओ में बैठे ओएसडी के जरिए ही अभी विशेष ट्रांसफर किए जा रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि सीएम के अलावा कैबिनेट के किसी भी मंत्री को ट्रांसफर की पावर नहीं मिली हुई है।


Transfers : हरियाणा में वेरिफिकेशन के चक्कर में अटकी ट्रांसफर पॉलिसी

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