स्कूल टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि मंडल ने आठवें वेतन आयोग के बुलावे दिल्ली जाकर आयोग के अधिकारियों के साथ बातचीत की और अध्यापकों की मांगों और अध्यापन कार्य की महत्ता, प्रतिष्ठा और देश के नवनिर्माण में उसकी आवश्यकता के अन्तर्सम्बन्ध को स्पष्ट किया।
आयोग के अधिकारी अध्यापकों के द्वारा प्रस्तुत तर्कों से काफी प्रभावित भी दिखे। उन्होंने संगठन द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन को अच्छे से पढ़ा हुआ था। इसलिए उससे सम्बन्धित अनेकों सवाल उठाए गए। मसलन, शिक्षण कार्य की गुणवत्ता अन्य कर्मचारियों से अलग किस तरह है? स्वाध्याय भत्ते के पीछे क्या मुख्य कारण हैं? स्कूल मुखिया को प्रशासनिक भत्ता क्यों दिया जाना चाहिए? प्रशासनिक काम तो सभी विभागों में होता है।
यद्यपि कुल दस मिनट का समय अलॉट हुआ था लेकिन आयोग संतोषजनक ढंग से पूरे विषय पर सवाल किए और शिक्षकों की बात सुनी।
उल्लेखनीय है कि पहले भी पाँचवाँ व छठा वेतन आयोग एसटीएफआई की बात सुनकर शिक्षकों को अतिरिक्त लाभ दे चुके हैं। इस बार भी फैडरेशन ने 29 मार्च को आयोग द्वारा जारी बुनियादी प्रश्नोत्तरी और 16 अप्रैल को मूल ज्ञापन वेतन आयोग की वैबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर दिया था। प्रतिनिधि मंडल में स्कूल टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सी.एन.भारती, उपाध्यक्ष महावीर सिहाग व प्रभु सिंह, अध्यक्ष हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ शामिल थे। उन्होंने उम्मीद जताई है तथा मांग की है कि आठवां वेतन आयोग देश के शिक्षकों के साथ न्याय करते हुए बेहतर वेतनमान और भत्ते आदि की सिफारिश करे।
8th CPC Meeting: आठवें वेतन आयोग से मिला स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (STFI) का प्रतिनिधि मंडल!
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