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सदन में पार्षद महिला की जगह नहीं बैठ पाएंगे पार्षद पति...

Raman Deep Kharyana :-

नगर निकाय बैठकों में महिला पार्षद की उपस्थिति अनिवार्य, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई


चंडीगढ़ 

हरियाणा में महिला सशक्तिकरण को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब प्रदेश की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों की बैठकों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति, भाई, बेटे या किसी भी पुरुष प्रतिनिधि के बैठने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।


शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULB) की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई पुरुष प्रतिनिधि महिला पार्षद की जगह सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेता या हस्तक्षेप करता पाया गया तो संबंधित पार्षद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


सरकार के संज्ञान में आया था कि ‘प्रतिनिधि प्रथा’ के कारण महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य कई जगहों पर पूरा नहीं हो पा रहा था। अक्सर महिलाएं चुनाव तो जीत जाती हैं, लेकिन सदन के भीतर उनके अधिकारों और शक्तियों का इस्तेमाल उनके परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं। आम बोलचाल में इन्हें ‘पार्षद पति’ या ‘सुपर पार्षद’ कहा जाता है।


इसी प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि नगर निकायों की बैठकों में महिला पार्षद की स्वयं उपस्थिति अनिवार्य होगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाएं अपने वार्ड की समस्याओं को खुद सदन में रखेंगी, जिससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होगी।


नए निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नगर निगमों को हर महीने कम से कम एक बैठक और हर छह महीने में तीन दिन का विधिवत सत्र बुलाना अनिवार्य होगा।


वहीं नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की अगली सदन बैठक 19 मार्च को प्रस्तावित है। निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बैठक में किसी भी महिला पार्षद के प्रतिनिधि को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही अब बैठकों की सूचना और कार्यवाही की रिपोर्ट संबंधित सांसदों और विधायकों को भेजना भी अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

सदन में पार्षद महिला की जगह नहीं बैठ पाएंगे पार्षद पति...

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