उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम और अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की क्षमता, रुचि और प्रतिभा को पहचानते हुए उसके सर्वांगीण विकास और व्यक्तित्व निर्माण को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अंबाला में शिक्षा व्यवस्था को ऐसे मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां हर बच्चे के सीखने के स्तर के साथ-साथ उसके आत्मविश्वास, रचनात्मकता, कौशल, खेल प्रतिभा और व्यक्तित्व विकास पर भी समान ध्यान दिया जाए।
उपायुक्त ने निपुण हरियाणा मिशन, एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमेरसी), मिड-डे मील, ड्रॉप-आउट, स्मार्ट क्लासिज, समग्र शिक्षा, प्रोजेक्ट विश्वास, सुपर-100, सुपर-40, उल्लास, मिशन बुनियाद, ज्ञान संस्कार मंच, इंस्पायर-मानक, मैथेमेटिक्स ओलंपियाड तथा स्कूलों में पौधारोपण सहित विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से प्रत्येक कार्यक्रम की प्रगति की जानकारी लेते हुए लर्निंग आउटकम को विद्यार्थी स्तर पर मापने और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
हर बच्चे की अलग क्षमता, उसी के अनुरूप मिले अवसर
उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक बच्चा अलग क्षमता, रुचि और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ता है। इसलिए विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित किया जाना चाहिए, जहां बच्चों को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें खेल-कूद, रचनात्मक गतिविधियों, प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नवाचार और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी आगे बढऩे के अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर व्यक्तिगत ध्यान दें तथा जिन विद्यार्थियों को किसी विशेष विषय या कौशल में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, उनके लिए समयबद्ध सुधारात्मक प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य केवल अच्छे परीक्षा परिणाम प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे आत्मविश्वासी, सक्षम, रचनात्मक और संवेदनशील बच्चों का निर्माण करना होना चाहिए, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मनिर्भरता के साथ कर सकें।
अंबाला में शिक्षा परिवर्तन की दिशा में तेज कदम, हर बच्चे के व्यक्तिगत विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष फोकस: उपायुक्त सचिन गुप्ता
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